Canonical टैग क्या होता है ?
08 October 2021
आज की डिजिटल दुनिया में जब आप अपनी वेबसाइट को Google जैसे सर्च इंजनों में बेहतर रैंकिंग दिलाना चाहते हैं, तो SEO के कई तकनीकी पहलू होते हैं जिनका ध्यान रखना जरूरी होता है। इनमें से एक अहम चीज है Canonical Tag। अक्सर वेबसाइट मालिक या ब्लॉगर अनजाने में एक ही कंटेंट को अलग-अलग URLs पर डाल देते हैं, जिससे Google को समझने में दिक्कत होती है कि असली या मूल पेज कौन सा है। इसी समस्या को हल करने के लिए Canonical Tag का उपयोग किया जाता है।
Canonical Tag एक ऐसा HTML टैग होता है जो सर्च इंजन को बताता है कि आपकी साइट पर मौजूद कई समान या डुप्लिकेट पेजों में से असली या मुख्य पेज कौन सा है। इसका सिंटैक्स कुछ इस तरह होता है:
यह टैग Google को संकेत देता है कि यह URL ही असली है और इसी को रैंकिंग देनी चाहिए।
जब आपकी वेबसाइट पर एक ही कंटेंट कई अलग-अलग URLs पर होता है, तो इसे Duplicate Content कहा जाता है। उदाहरण के लिए:
तीनों पेजों का कंटेंट एक जैसा हो सकता है, लेकिन URLs अलग-अलग हैं। Google इस स्थिति में कंफ्यूज हो जाता है कि कौन सा पेज दिखाना है और किसे रैंकिंग देनी है। यहां Canonical Tag मदद करता है और स्पष्ट करता है कि असली पेज कौन सा है।
यह टैग खासकर तब जरूरी होता है जब:
Canonical Tag को अपने वेबपेज के
सेक्शन में इस तरह डालें:WordPress यूज़र्स के लिए यह खुशखबरी है कि अधिकांश SEO प्लगइन्स जैसे Yoast SEO, Rank Math, और All in One SEO अपने आप Canonical URLs जनरेट कर देते हैं। आप मैन्युअली भी जरूरत पड़ने पर इसे एडिट कर सकते हैं।
कई बार लोग Canonical Tag और 301 Redirect को एक जैसा समझते हैं, लेकिन फर्क है:
अगर URL हमेशा के लिए बदलना हो तो 301 Redirect सही है, लेकिन अगर आप कई URLs रखना चाहते हैं पर रैंकिंग एक ही पेज को देनी है तो Canonical Tag बेहतर है।
Canonical Tag से डुप्लिकेट कंटेंट प्रॉब्लम खत्म होती है, रैंकिंग बेहतर होती है, SEO मजबूत होता है, और Google की कंफ्यूजन कम होती है। लेकिन कुछ सामान्य गलतियां भी होती हैं जैसे:
Self Canonical Tag का मतलब है कि आप उसी पेज के URL को canonical सेट करते हैं, जिससे Google को साफ़ पता चलता है कि यही पेज असली है। यह SEO के लिए बहुत उपयोगी होता है, खासकर ब्लॉग पोस्ट्स में।
यह खासतौर पर उन वेबसाइट्स के लिए जरूरी है जहाँ:
यहां तक कि साधारण ब्लॉग्स में भी URL duplicates बन सकते हैं, इसलिए Canonical Tag महत्वपूर्ण होता है।
आप अपने पेज के सोर्स कोड में जाकर, SEO टूल्स की मदद से या Google Search Console के URL इंस्पेक्शन से देख सकते हैं कि Canonical Tag सही तरीके से लगा है या नहीं।
Canonical Tag SEO का एक अहम हिस्सा है जो आपकी वेबसाइट को डुप्लिकेट कंटेंट की समस्या से बचाता है। यह Google को बताता है कि आपकी साइट पर असली पेज कौन सा है और किसे रैंकिंग मिलनी चाहिए। सही Canonical Tag लगाने से आपकी वेबसाइट की रैंकिंग बेहतर होती है और SEO का प्रदर्शन मजबूत बनता है। इसलिए अपनी वेबसाइट की SEO स्ट्रेटजी में इसे जरूर शामिल करें।